माफियाओं से डर कर जी रहे हैं अधिकारी और जन-प्रतिनिधि।

बिनोद प्रजापति की कलम से।

कल तक जो काम रात के अंधेरे मे चोरी चोरी होता था अब वही काम दिन के उजाले मे सब के आँखों के सामने हो रहा है,जी हां हम बात कर रहे हैं हसदेव नदी से रेत के अवैध उत्खनन की,

लेकिन विभाग के अधिकारी या एसडीएम किसी का भी ध्यान इस तरफ नही जा रहा जब की इस बात की जानकारी सब को है इतना ही नही कल तक जो पार्टी विपक्ष मे रह कर इस काम का विरोध कर रही थी आज वही पार्टी सत्ता मे है अब ऐसे मे विरोध की उम्मीद नही की जा सकती।लेकिन अब सवाल उठता है की जो रेत माफिया कल तक विपक्ष के डर से चोरी चोरी काम कर रहे थे

उन्हे आज ऐसी कौन सा ताक़त मिल गई जिससे इनका काम दिन के उजाले मे धड़ल्ले से चल रहा है और विभाग के अधिकारी मुक दर्शक बने तमाशा देख रहे है इतना ही नही आज विपक्ष भी चुप चाप सब कुछ देख कर भी अनदेखा कर रहा है,

तो क्या यह मान लिया जाए की वर्तमान सरकार के आने के बाद सेटलमेंट की राजनीति शुरु हो गई है?या रेत माफियाओं का डर सत्ता मे बैठी पार्टी के नेताओं और विपक्ष के नेताओं पर हावी है?क्या विभाग के अधिकारियों को भी इनका डर इतना ज्यादा है की कोई कार्यवाही नही हो रही है?

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